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  • 5 सितंबर से स्कूलों में शुरू होने जा रही है नई व्यवस्था, अब चेहरे से लगेगी अटेंडेंस

5 सितंबर से स्कूलों में शुरू होने जा रही है नई व्यवस्था, अब चेहरे से लगेगी अटेंडेंस

By: C4E Team Thu, 22 Aug 2019 12:40 PM

5 सितंबर से स्कूलों में शुरू होने जा रही है नई व्यवस्था, अब चेहरे से लगेगी अटेंडेंस

वर्तमान समय को बढ़ती टेक्नोलॉजी के लिए जाना जाता हैं और इसका इस्तेमाल हर कार्यक्षेत्र में आवश्यकतानुसार किया जा रहा हैं। इसी तकनिकी की ओर कदम बढाते हुए गुजरात के सरकारी स्कूलों में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके से नई व्यवस्था शुरू करने की कवायद चल रही है। इस व्यवस्था के अनुसार अब टीचर्स की अटेंडेंस के लिए फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम शुरू होने जा रहा है। जिसमें मशीन द्वारा शिक्षक के चहरे की पहचान की जाएगी और तभी उनकी अटेंडेंस लग पाएगी जिससे स्कूलों में होने वाली धांधली पर लगाम कसी जा सकेगी। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी द्वारा इसे लॉन्च किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था की मदद से 2.5 लाख शिक्षकों पर नजर रखी जा सकती हैं। गुजरात शिक्षा विभाग का इस व्यवस्था के बारे में कहना है कि यह एक फुल प्रूफ सिस्टम होगा जिसमें फर्जीवाड़े का चांस नहीं रहेगा। यह ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम एक एप्लीकेशन की मदद से काम करता है जिसमें जियो टैगिंग का प्रयोग किया जाता है।

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गुजरात में शिक्षा के प्रधान सचिव विनोद राव ने 10 मिनट का एक वीडियो और ऑडियो मैसेज रिकॉर्ड किया है, जिसे सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के वॉट्सएप ग्रुप के जरिए प्रसारित किया गया है। इसमें सभी सरकारी शिक्षकों से इस नए अटेंडेंस सिस्टम में सहयोग देने की अपील की गई है। प्रधान सचिव ने शिक्षकों से कहा है, 'अब आपके साथ कोई अन्याय नहीं होगा। कोई प्राचार्य आपको उपस्थित होने पर भी अनुपस्थित नहीं बता पाएगा।' इस नए अटेंडेंस सिस्टम के लिए शिक्षकों को माइक्रोसॉफ्ट एप 'कैजाला' या फेसबुक वर्कप्लेस डाउनलोड करने के लिए कहा गया है।

हालांकि शिक्षक संघ इसके खिलाफ है। उनका कहना है कि इससे उनकी निजता का हनन होगा। साथ ही वे इस नई व्यवस्था के लिए सरकार के पास ढांचागत और आर्थिक संसाधनों की कमी का भी सवाल उठा रहे हैं। गुजरात राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ का कहना है कि 'इस बारे में हमारे साथ चर्चा भी नहीं की गई। हमने प्रधान सचिव तक संदेश पहुंचा दिया है कि कोई भी शिक्षक बताए गए एप डाउनलोड नहीं करेगा'। हालांकि प्रधान सचिव का कहना है कि 'किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले इसका विरोध झेलना ही पड़ता है। यह सामान्य बात है। अगर किसी को इस बारे में कोई गलतफहमी हो रही हो, तो वह मुझसे सीधा संपर्क कर सकता है।'

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