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आज सुभाष चंद्र बोस की 123वीं जयंती, जनून उनके जीवन की मुख्य बातें

By: C4E Team Thu, 23 Jan 2020 6:26 PM

आज सुभाष चंद्र बोस की 123वीं जयंती, जनून उनके जीवन की मुख्य बातें

23 जनवरी 1897 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म हुआ था और आज उनकी 123वीं जयंती मनाई जा रही हैं। अपनी वीरता और अंग्रेजों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए नेताजी का नाम सर्वोपरी आता था। उनके देश सेवा के जज्बे को देखते हुए ही महात्मा गांधी ने उन्हें देशभक्तों का देशभक्त कहा था। आज हम आपको उनके जीवन से जुड़ी कुछ मुख्य बातों की जानकारी देने जा रहे हैं। तो आइये जानते हैं।

- नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक में एक बंगाली परिवार में हुआ था। उनका निधन 18 अगस्त 1945 को हो गया था। जब उनका निधन हुआ तब वे सिर्फ 48 साल के थे।

- नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देश को 'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा' का नारा दिया था। जो युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था।

- सुभाष चंद्र बोस भारत के एक महान स्वतंत्रता सैनानी के रूप में पहचाने जाते हैं। उनके द्वारा दिया गया ‘जय हिन्द जय भारत’ का नारा, भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया हैं।

- वे इंडियन सिविल सर्विस (ICS) की तैयारी हेतु इंग्लैंड के कैंब्रिज विश्वविद्यालय चले गये। अंग्रेजों के शासन में भारतीयों के लिए सिविल सर्विस में जाना बहुत ही मुश्किल था। उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा में चौथा स्थान हासिल किया था।

- वे सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा को छोड़कर देश को आजाद कराने की मुहिम का हिस्सा बन गये थे। उनको अपने जीवन में 11 बार जेल जाना पड़ा था। वे सबसे पहले 16 जुलाई 1921 को जेल गये थे।

- आजाद हिंद फौज में लगभग 85000 सैनिक शामिल थे। इसमें एक महिला यूनिट भी थी जिसकी कैप्टन लक्ष्मी स्वामीनाथन थी।

- आजाद हिंद फौज के लोगों 1944 को 19 मार्च के दिन पहली बार झंडा फहराया था। आजाद हिंद फौज ने बर्मा की सीमा पर अंग्रेजों के खिलाफ जोरदार लड़ाई लड़ी थी।

- नेताजी के कुल 13 भाई-बहन थे जिनमें 5 भाई और 8 बहनें थीं। सुभाष चंद्र बोस अपने माता-पिता के 9वीं संतान और 5वें बेटे थे।

- नेताजी ने साल 1937 में अपनी सेक्रटरी और ऑस्ट्रिया की रहने वाली एमिली शेंकल से शादी की थी। दोनों की अनीता नाम की बेटी हुई जो अभी सपरिवार जर्मनी में रहती हैं।

- नेताजी कांग्रेस के गरम दल के युवा नेता थे। वे साल 1938 और साल 1939 में कांग्रेस के अध्यक्ष बने। उन्होंने साल 1939 में कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

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