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चांद पर रात होने के बाद भी इसरो ने नहीं खोई उम्मीद, फिर की जाएगी विक्रम से संपर्क करने की कोशिश

By: C4E Team Sun, 22 Sept 2019 3:19 PM

चांद पर रात होने के बाद भी इसरो ने नहीं खोई उम्मीद, फिर की जाएगी विक्रम से संपर्क करने की कोशिश

चंद्रयान भारत और इसरो के लिए एक महत्वपूर्ण मिशन था जिसकी सफलता बहुत मायने रखती थी। हांलाकि अब चांद पर रात हो चुकी हैं और वहां पर अब तापमान माइनस 180 सेल्सियस तक चला जाएगा जिसका सामना कर पाना लैंडर विक्रम के लिए आसान नहीं होगा। इसरो द्वारा विश्लेषण कर जानकारी दी गई हैं कि लैंडर विक्रम करीब 200 किमी की रफ्तार से चंद्रमा की सतह पर टकराया हैं और ऑर्बिटर द्वारा भेजी गई तस्वीरों से पता चलता हैं कि विक्रम के पांव चांद की सतह पर धंस चुके हैं या वह एक करवट लेकर गिरा हुआ हैं।

इसरो प्रमुख के. सिवन ने बताया कि हम विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित करने में सफल नहीं हो पाए। लेकिन चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर (orbiter) बिल्कुल सही और अच्छा काम कर रहा है। इस ऑर्बिटर में कुल आठ उपकरण लगे हैं। हर उपकरण का अपना अलग-अलग काम निर्धारित है। ये सभी उस काम को बिल्कुल उसी तरह कर रहे हैं जैसा प्लान किया गया था।

इसरो के एक अधिकारी द्वारा बताया गया है कि चांद पर रात के दौरान बेहद कम तापमान में चंद्रयान-2 के लैंडर और रोवर के उपकरण का सक्रिय रह पाना बहुत मुश्किल है। हालांकि उसे सक्रिय रखा जा सकता था, अगर उसमें आइसोटोप हीटर लगा होता। इन सभी चुनौतियों के बावजूद इसरो (ISRO) ने उम्मीद नहीं खोई हैं और अगले लूनर डे पर विक्रम (vikram) से एक बार फिर संपर्क की कोशिश की जाएगी। यह लूनर डे 7 से 20 अक्टूबर तक रहेगा। इसरो विक्रम से 14 अक्टूबर को संपर्क करने की कोशिश करेगा।

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