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  • आखिर क्यों की गई चंद्रयान-2 की गति में 90 फीसदी की कमी, जानें इसकी बड़ी वजह

आखिर क्यों की गई चंद्रयान-2 की गति में 90 फीसदी की कमी, जानें इसकी बड़ी वजह

By: C4E Team Tue, 20 Aug 2019 1:54 PM

आखिर क्यों की गई चंद्रयान-2 की गति में 90 फीसदी की कमी, जानें इसकी बड़ी वजह

22 जुलाई 2019 को धरती से अन्तरिक्ष में रॉकेट जीएसएलवी एमके-3 की मदद से चंद्रयान-2 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया था। यह स्पेसक्राफ्ट तीन भागों ऑर्बिटर, लैंडर 'विक्रम' और रोवर 'प्रज्ञान' से मिलकर बना हुआ हैं। इसका मिशन का मुख्य उद्देश्य चांद को लेकर हमारी समझ को और बेहतर करना और मानवता को लाभान्वित करने वाली खोज करना है। आज ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा चंद्रयान-2 को चांद की पहली कक्षा में सफलतापूर्वक दाखिल कराया गया हैं और इसके लिए चंद्रयान-2 की गति में लगभग 90 फीसदी कटौती की गई हैं। जी हाँ, चंद्रयान की गति को 10.98 किमी प्रति सेकंड से कम कर लगभग 1.98 किमी प्रति सेकंड किया गया।

चंद्रयान-2 की गति में 90 प्रतिशत की कमी इसलिए की गई है जिससे की वह चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के प्रभाव में आकर चांद से न टकरा जाए। इसरो के अनुसार, यह इस मिशन के सबसे मुश्किल अभियानों में से एक था। क्योंकि अगर सेटेलाइट चंद्रमा पर उच्च गति वाले वेग से पहुंचता है, तो वह उसे उछाल देगा और ऐसे में वह अंतरिक्ष में खो जाएगा, लेकिन यदि वह धीमी गति से पहुंचता है तो चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण चंद्रयान 2 को खींच लेगा और वह सतह पर गिर सकता है।

चंद्रयान-2 के चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने के बाद इसरो कक्षा के अंदर स्पेसक्रॉफ्ट की दिशा में चार बार (21 अगस्त, 28 अगस्त एवं 30 अगस्त तथा 01 सितंबर) और परिवर्तन करेगा। इसके बाद चंद्रयान-2 चंद्रमा के ध्रुव के ऊपर से गुजरकर उसके सबसे नजदीक 100 किलोमीटर की दूरी के अपने अंतिम कक्षा में पहुंच जाएगा। अंतिम कक्षा में पहुंचने के बाद विक्रम लैंडर 2 सितंबर को चंद्रयान-2 से अलग होकर चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। इसरो के अनुसार, चंद्रमा की सतह पर 07 सितंबर 2019 को लैंडर से उतरने से पहले धरती से दो कमांड दिए जाएंगे, जिससे की लैंडर की गति एवं दिशा सुधारी जा सके और वे हल्के से सतह पर उतरे।

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